जोहार देवघर, 12 जनवरी। हिंदू धर्म में मकर संक्रांति का विशेष महत्व माना गया है। यह पर्व सूर्य देव को समर्पित होता है और इसी दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं। इसे सूर्य के उत्तरायण होने का प्रतीक माना जाता है, जिससे शुभ कार्यों की शुरुआत होती है। मकर संक्रांति पर स्नान, दान, पूजा और खिचड़ी खाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। कहा गया है कि इस दिन किए गए पुण्य कार्यों का फल कई गुना बढ़ जाता है।
हालांकि, जितना महत्व इस दिन शुभ कार्यों का है, उतना ही जरूरी कुछ नियमों का पालन करना भी माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन कुछ गलतियां सूर्य देव को अप्रसन्न कर सकती हैं, जिससे जीवन में बाधाएं आ सकती हैं। इसलिए इस पावन तिथि पर कुछ कार्यों से बचना चाहिए।
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मकर संक्रांति पर स्नान करने से जुड़े खास नियम
सबसे पहले स्नान का नियम बेहद अहम है। मकर संक्रांति के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना शुभ माना जाता है। बिना स्नान किए भोजन करना इस दिन वर्जित माना गया है। साथ ही सूर्यास्त के बाद भोजन न करने की भी परंपरा है। कहा जाता है कि इससे सूर्य देव का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
खान-पान से जुड़े नियमों का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए। मकर संक्रांति के दिन लहसुन, प्याज, मांस और मदिरा का सेवन पूरी तरह निषिद्ध माना गया है। इस दिन सात्विक भोजन करना चाहिए। विशेष रूप से खिचड़ी का सेवन और दान शुभ फल देता है। कई क्षेत्रों में इस दिन रोटी न बनाने की परंपरा भी प्रचलित है।
मकर संक्रांति के दिन पेड़-पौधों की कटाई या छंटाई से जुड़े कार्य नहीं करने चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन प्रकृति से जुड़े कार्यों को नुकसान पहुंचाना अशुभ माना जाता है। यही वजह है कि कई किसान इस दिन फसलों की कटाई से भी परहेज करते हैं।
दान-पुण्य में न करें लापरवाही
मकर संक्रांति पर तिल और गुड़ का दान विशेष महत्व रखता है। सूर्य देव को अर्घ्य देकर तिल-गुड़ का सेवन करने से सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। इसके अलावा खास बात ये भी है कि अगर आप मकर संक्रांति के दिन विधि-विधान से पूजा, दान और नियमों का पालन करते हैं, तो सूर्य देव की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
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