जोहार देवघर, 5 जनवरी। हिंदू धर्म में देवी-देवताओं की पूजा का खास महत्व है। मान्यता है कि सही विधि और नियमों के साथ की गई पूजा से घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है। लेकिन कई बार लोग अनजाने में पूजा के दौरान ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिससे लाभ की जगह वास्तु दोष बना रहता है। ऐसे में आज हम आपको पूजा के कुछ खास नियम बताने जा रहे हैं, जिनका पालन करना बेहद जरूरी है।
पूजा का सही समय तय करें
वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में पूजा का एक निश्चित समय होना चाहिए। दिनभर में पांच शुभ मुहूर्त होते हैं, जिनमें भगवान की आराधना की जा सकती है। सबसे उत्तम समय ब्रह्म मुहूर्त माना जाता है। अगर इतनी सुबह उठना संभव न हो, तो सुबह 9 या 10 बजे तक पूजा कर सकते हैं। इसके अलावा शाम को सोने से पहले भी पूजा करना शुभ माना जाता है। नियमित समय पर पूजा करने से सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।
इन पंचदेवों का स्मरण बेहद जरूरी
शास्त्रों में बताया गया है कि पूजा की शुरुआत भगवान गणेश से करनी चाहिए। वास्तु विशेषज्ञों का मानना है कि पूजा आरंभ करते समय सूर्य, गणेश, दुर्गा, शिव और विष्णु इन पंचदेवों का स्मरण जरूर करना चाहिए। ऐसा करने से घर में सुख-समृद्धि और मानसिक शांति आती है।
भोग में अर्पित करें तुलसी के पत्ते
हिंदू धर्म में तुलसी को बेहद पवित्र माना गया है। देवी-देवताओं को भोग अर्पित करते समय तुलसी का पत्ता जरूर शामिल करें, लेकिन भगवान शिव, गणेश और भैरव को तुलसी अर्पित नहीं करनी चाहिए। साथ ही रविवार, एकादशी, द्वादशी, संक्रांति और शाम के समय तुलसी के पत्ते तोड़ने से बचें। मान्यता है कि ऐसा करने से माता लक्ष्मी नाराज हो सकती हैं।
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दीपक जलाने का खास नियम
पूजा करते समय व्यक्ति का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। पूजा में तेल या घी का दीपक जलाएं, लेकिन एक दीपक से दूसरे दीपक को जलाने से बचें, क्योंकि इससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।
वास्तु के अनुसार रखें भगवान की मूर्तियां
घर के मंदिर में भगवान की मूर्तियां 1, 3, 5, 7, 9 या 11 इंच की होनी चाहिए। खड़े हुए गणेश जी, माता लक्ष्मी या सरस्वती की प्रतिमा घर में रखना वास्तु के अनुसार उचित नहीं माना जाता है। इसके अलावा अगर मंदिर में कोई टूटी या क्षतिग्रस्त मूर्ति हो, तो उसे तुरंत हटा देना चाहिए। ऐसी मूर्तियों को दान करने या किसी पवित्र नदी में विसर्जित करना शुभ माना जाता है।
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