जोहार रांची, 23 जनवरी। वसंत पंचमी माता सरस्वती को समर्पित है। लेकिन, यह सिर्फ पूजा तक ही सीमित नहीं है। वसंत ऋतु अपने साथ बहुत कुछ लेकर आती है। नव संवत्सर में नए साल की ताजगी है तो दूसरी तरफ प्रकृति के भीतर छिपे कई रहस्यों को भी हमारे सामने लाती है। आज हम आपको बताते हैं वसंत पंचमी से जुड़ी अनोखी जानकारियां।
भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में कहा है, 'ऋतुनां कुसुमाकरः' मतलब ऋतुओं में मैं वसंत हूं। वसंत ऐसा समय है, जब पूरी सृष्टि प्रकृति के रंगों से सराबोर हो जाती है। हर तरफ नवीन ऊर्जा देखने को मिलती है। यह मौसम आध्यात्मिक जागरण के साथ ही हमारी चेतना पर भी काम करता है। इस मौसम की ऊर्जा हमारे लिए महत्वपूर्ण है।
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माता सरस्वती का आशीर्वाद लाए बदलाव
वसंत पंचमी विद्या और ज्ञान की देवी मां सरस्वती के जन्म से भी जुड़ी है। यह दिन बुद्धि और कला का अनोखा संगम है। मां सरस्वती ज्ञान की भी प्रतीक हैं। उनके आशीर्वाद के बिना छात्र, लेखक, कलाकार, संगीतज्ञ, गायक, चित्रकार और विचारक का जीवन अधूरा है। उनकी कृपा ही आम मनुष्य को समाज में खास बना देती है।
वसंत का मौसम... भारतीय वेलेंटाइन डे...
वसंत को कामदेव को समर्पित माना जाता है। उन्हें मदन भी कहा जाता है, इस लिहाज से यह मदनोत्सव के नाम से भी जाना जाता है। यह समय प्रकृति और मनुष्य के भीतर नई ऊर्जा, यौवन और उत्साह का संचार करता है। इसका जिक्र चरक संहिता में भी है। कहने का मतलब है कि यह आपको प्रकृति से करीब से जोड़ देता है।
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वसंत का मतलब प्रकृति का मेकओवर भी…
वसंत पंचमी को 'रिफ्रेश बटन' भी कहा जाता है। कहने का मतलब है कि जो पुराना है, वह झड़ जाता है और जो नया है, वह खिल उठता है। खेतों में पीले सरसों के फूल को देखकर चेहरे पर संतोष और खुशी के भाव दिखाई देते हैं। पलाश (टेसू) के लाल फूल भी मन मोह लेते हैं। कोयल और भंवरे भी दिल को खुश कर देते हैं।
प्रकृति के सानिध्य में रहकर स्वास्थ्य लाभ करें
वसंत ऋतु को प्रकृति का हीलिंग सीजन भी कहा जाता है। यह प्रकृति के सानिध्य में रखकर आपको स्वस्थ करता है। इस ऋतु में हवा शुद्ध होती है, जो आपको तरोताजा रहने में मदद करती है। इस समय आप प्राणायाम, योग और साधना भी शुरू कर सकते हैं। इसका असर जीवन भर आपके शरीर पर देखने को मिलता है।
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