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झारखंड की वादियों में गूंजा 'लाल इश्क', जब मोहब्बत ने तोड़ी हदें, नेतरहाट से इंग्लैंड तक हुई मशहूर

झारखंड की वादियों में गूंजा 'लाल इश्क', जब मोहब्बत ने तोड़ी हदें, नेतरहाट से इंग्लैंड तक हुई मशहूर

जोहार रांची, 17 जनवरी। फरवरी का महीना आने वाला है और यह माह प्रेमी-प्रेमिकाओं के लिए बेहद खास होता है क्योंकि सभी 'वैलेंटाइन डे' के खास मौके पर अपने प्यार का इजहार करते हैं और एक-दूसरे को तोहफे देते हैं। इसी दौरान उन अमर प्रेम कहानियों को याद करने का भी मौका मिलता है, जिनसे आज की पीढ़ी प्रेरणा लेती है। झारखंड की धरती पर ऐसी कई प्रेम कथाएं दर्ज हैं, जो आज तक लोगों के दिलों को छू जाती हैं। भले ही इन्हें आप नहीं जानते हों, हम आपको बताते हैं जब मोहब्बत सारी हदें तोड़ती है तो क्या होता है।

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नेतरहाट के मैगनोलिया प्वाइंट की अधूरी मोहब्बत

झारखंड के नेतरहाट का सनसेट प्वाइंट सिर्फ खूबसूरत नजारे के लिए ही नहीं, बल्कि एक दर्दनाक प्रेम कहानी के लिए भी जाना जाता है। यहां एक साधारण चरवाहा रोज शाम अपने मवेशियों को चराते हुए बांसुरी बजाता था। उसी दौरान एक अंग्रेज अधिकारी अपनी बेटी मैगनोलिया के साथ गांव में छुट्टियां मनाने आया। चरवाहे की बांसुरी की धुन मैगनोलिया के दिल में उतर गई। दोनों की मुलाकातें बढ़ीं और प्यार परवान चढ़ने लगा। लेकिन जब इस रिश्ते की भनक मैगनोलिया के पिता को लगी, तो गुस्से में उसने चरवाहे की हत्या करवा दी। प्रेमी की मौत से टूट चुकी मैगनोलिया ने भी सनसेट प्वाइंट से खाई में कूदकर जान दे दी। आज भी यह जगह अमर प्रेम की निशानी मानी जाती है।

बैजल सोरेन की बांसुरी की गूंज इंग्लैंड तक पहुंची...

गोड्डा जिले के सुंदरपहाड़ी प्रखंड के कल्हाझोर गांव के बैजल सोरेन अपनी बांसुरी के लिए मशहूर थे। एक बार साहूकार द्वारा गांव के मवेशियों को बंधक बनाए जाने पर बैजल ने उसका विरोध किया और अंग्रेजों की गिरफ्त में आ गए। उन्हें फांसी की सजा सुनाई गई, लेकिन फांसी से पहले उन्होंने बांसुरी बजाई। धुन इतनी मनमोहक थी कि अंग्रेज अधिकारी उसमें खो गए और फांसी का वक्त टल गया। बाद में बैजल को एक अंग्रेज अफसर की बेटी से प्रेम हो गया, जो उन्हें अपने साथ इंग्लैंड ले गई।

पंचघाघ जलप्रपात में पांच बहनों के टूटे दिल की कहानी

खूंटी जिले का पंचघाघ जलप्रपात भी एक दुखद प्रेम कहानी का गवाह है। मान्यता है कि यहां बहने वाली पांच धाराएं पांच बहनों की प्रतीक हैं। कहा जाता है कि पांचों बहनों को एक ही पुरुष से प्रेम हो गया था। जब उन्हें धोखे का एहसास हुआ, तो सभी ने एक साथ नदी में कूदकर जान दे दी। इसके बाद ही जलप्रपात की धारा पांच हिस्सों में बंट गई। आज भी यहां पर बड़ी संख्या में लोग आते हैं और उस अधूरी मोहब्बत को महसूस करने की कोशिश करते हैं, जो कभी पूरी नहीं हो सकी और पानी में खो गई।

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दशम फॉल में गूंजती है छायला की अधूरी प्रेम कहानी

रांची से जमशेदपुर जाने वाले रास्ते में स्थित दशम फॉल (दशम झरना) अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के साथ-साथ खौफनाक रहस्य के लिए भी जाना जाता है। दशम फॉल से जुड़ा सबसे चर्चित रहस्य छायला सांदू नाम के युवक की कहानी है, जिसे आज भी गांवों में सुनाया जाता है। सैकड़ों साल पहले छायला सांदू ढोल, डुगडुगी और बांसुरी बजाने वाला एक खुशमिजाज युवक था। वह घूंघरू बांधकर नाच-गाकर गांव-गांव घूमता था। इसी दौरान उसे दशम फॉल के उस पार बसे गांव की एक लड़की से प्रेम हो गया था। छायला रोज एक लता (बेल) के सहारे फॉल को पार कर अपनी प्रेमिका से मिलने जाता था। उसकी भाभी को यह रिश्ता मंजूर नहीं था। एक दिन उसने साजिश रचते हुए लता को काट दिया। जब छायला हमेशा की तरह फॉल पार करने लगा, तो लता टूट गई और वह पानी में गिरकर डूब गया।

आज भी फॉल में भटकती है छायला सांदू की आत्मा...

स्थानीय लोगों का मानना है कि छायला सांदू की आत्मा आज भी दशम फॉल के आसपास भटकती है। कहा जाता है कि यह आत्मा खासतौर पर युवाओं को अपनी ओर खींचती है, जिसकी वजह से यहां डूबने वालों में ज्यादातर युवा ही होते हैं। गांव वाले मानते हैं कि यही आत्मा लोगों की मौत का कारण है। स्थानीय रिकॉर्ड और लोगों की मानें तो हर साल कई लोग फॉल में डूबने से जान गंवाते हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से लगभग सभी युवा थे। प्रशासन द्वारा चेतावनी बोर्ड लगाए जाने के बावजूद लोग खतरे को नजरअंदाज कर देते हैं।

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