जोहार रांची, 12 जनवरी। ये कहानी लैला-मजनू, रोमियो-जूलियट, शीरीं-फरहाद इतनी प्रसिद्ध तो नहीं, लेकिन, उनसे कमतर भी नहीं। कहते हैं प्रेम की नदी में जो उतरता है, वो डूब जाता है और जो डूबता है, वो पार जरूर लगता है। कुछ इसी हिसाब के प्रेम को छायला सांदू ने जिया और अमर हो गया। उसकी कहानी दशम फॉल से जुड़ी है, जो कई तरह के अंधविश्वासों, अनुमानों और विरोधाभासों में रची-बुनी है।
बड़ा सवाल - दशम फॉल या 'मौत का फॉल'
झारखंड की राजधानी रांची से जमशेदपुर जाने वाले रास्ते में स्थित दशम फॉल (दशम झरना) आज अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के साथ-साथ खौफनाक रहस्य के लिए भी जाना जाता है। ऊंचाई से गिरता दूधिया पानी, चारों ओर हरियाली और शांत माहौल पहली नजर में किसी को स्वर्ग से कम नहीं लगता, लेकिन इसी खूबसूरती के पीछे छिपा है एक ऐसा डर, जिसने दशम फॉल को 'मौत का फॉल' बना दिया है। वजह यहां हर साल डूबने से होने वाली रहस्यमयी मौतें हैं।
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क्यों कहा जाता है इसे मौत का फॉल?
दशम फॉल देखने में जितना शांत और आकर्षक है, उतना ही खतरनाक भी माना जाता है। यहां का पानी ऊपर से मीठा और शांत दिखता है, लेकिन भीतर तेज धाराएं और गहरे भंवर मौजूद हैं। स्थानीय मान्यता है कि इस फॉल में नहाने उतरने वाले कई लोग अचानक गायब हो जाते हैं और कुछ ही देर में उनकी लाशें मिलती हैं। कई घटनाओं ने इस डर को पुख्ता किया है, तो कई लोग इस फॉल से प्यार भी करते हैं।
छायला सांदू की अधूरी प्रेम कहानी
दशम फॉल से जुड़ा सबसे चर्चित रहस्य छायला सांदू नाम के युवक की कहानी है, जिसे आज भी गांवों में सुनाया जाता है। सैकड़ों साल पहले छायला सांदू ढोल, डुगडुगी और बांसुरी बजाने वाला एक खुशमिजाज युवक रहता था। वह घूंघरू बांधकर नाच-गाकर गांव-गांव घूमता था। इसी दौरान उसे दशम फॉल के उस पार बसे गांव की एक लड़की से प्रेम हो गया था। छायला रोज एक लता (बेल) के सहारे फॉल को पार कर अपनी प्रेमिका से मिलने जाता था। उसकी भाभी को यह रिश्ता मंजूर नहीं था। एक दिन उसने साजिश रचते हुए लता को काट दिया। जब छायला हमेशा की तरह फॉल पार करने लगा, तो लता टूट गई और वह पानी में गिरकर डूब गया।
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आज भी फॉल में भटकती है आत्मा
स्थानीय लोगों का मानना है कि छायला सांदू की आत्मा आज भी दशम फॉल के आसपास भटकती है। कहा जाता है कि यह आत्मा खासतौर पर युवाओं को अपनी ओर खींचती है, जिसकी वजह से यहां डूबने वालों में ज्यादातर युवा ही होते हैं। गांव वाले मानते हैं कि यही आत्मा लोगों की मौत का कारण है। स्थानीय रिकॉर्ड और लोगों की मानें तो हर साल कई लोग फॉल में डूबने से जान गंवाते हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से लगभग सभी युवा थे। प्रशासन द्वारा चेतावनी बोर्ड लगाए जाने के बावजूद लोग खतरे को नजरअंदाज कर देते हैं।
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