जोहार रांची, 12 जनवरी। झारखंड में दिसंबर 2025/जनवरी 2026 में लागू हुए PESA (Panchayats Extension to Scheduled Areas Act) कानून ने आदिवासी समुदायों के लिए महत्वपूर्ण अधिकार सुनिश्चित किए हैं। इस कानून के तहत ग्राम सभाओं को अपने गांव और क्षेत्र के जल, जंगल, जमीन और अन्य प्राकृतिक संसाधनों पर नियंत्रण और स्वशासन का अधिकार मिला है। इसका मतलब है कि किसी भी विकास कार्य, भूमि अधिग्रहण या खनन परियोजना के लिए ग्राम सभा की सहमति अनिवार्य होगी।
PESA कानून क्या है?
PESA का पूरा नाम “Panchayats (Extension to Scheduled Areas) Act, 1996” है। यह कानून अनुसूचित क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी समुदायों को अपने पारंपरिक अधिकारों और स्वशासन को बनाए रखने का अधिकार देता है। इसका उद्देश्य आदिवासियों को उनके क्षेत्रीय संसाधनों और फैसलों पर नियंत्रण देना है।
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झारखंड में PESA के मुख्य प्रावधान
ग्राम सभा की सर्वोच्चता :- सभी महत्वपूर्ण फैसलों में ग्राम सभा का अंतिम अधिकार होगा।
संसाधनों पर नियंत्रण :- जल, जंगल, जमीन और लघु वनोपज जैसे महुआ, तेंदूपत्ता और साल बीज पर ग्राम सभा का नियंत्रण होगा।
भूमि अधिग्रहण :- कोई भी विकास या खनन परियोजना ग्राम सभा की अनुमति के बिना नहीं हो सकती।
शराब पर नियंत्रण :- ग्राम सभा तय करेगी कि गांव में शराब की दुकानें खोलें या बंद हों।
परंपराओं की रक्षा :- ग्राम सभाओं को ऐसे नियमों को अस्वीकार करने का अधिकार है जो उनके रीति-रिवाज और संस्कृति के खिलाफ हों।
पुलिस और प्रशासन :- पुलिस को भी कुछ मामलों में ग्राम सभा की अनुमति लेनी होगी और गिरफ्तारी की सूचना देनी होगी।
झारखंड में PESA का क्या है प्रभाव
झारखंड के 13 जिले पूरी तरह और 3 जिले आंशिक रूप से PESA के दायरे में आते हैं। इनमें खूंटी, गुमला, सिमडेगा, लोहरदगा, लातेहार, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां, रांची (कुछ हिस्से), दुमका, जामताड़ा, साहिबगंज, पाकुड़, पलामू, गोड्डा और गढ़वा शामिल हैं। इस कानून से आदिवासी समुदाय में खुशी और संतोष है क्योंकि अब वे अपने संसाधनों और निर्णयों पर नियंत्रण महसूस कर रहे हैं। यह कानून आदिवासियों को शोषण से बचाता है, उनके जल-जंगल-जमीन पर हक सुनिश्चित करता है और स्थानीय लोकतंत्र को मजबूत करता है।
PESA कानून के लाभ
PESA कानून आदिवासी समुदाय को अधिकार देता है, उन्हें शोषण से बचाता है और जल-जंगल-जमीन पर उनके हक को सुनिश्चित करता है। यह झारखंड में आदिवासी समाज के विकास और सशक्तीकरण का एक बड़ा कदम है।
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