जोहार रांची, 20 दिसंबर। झारखंड, एक ऐसा राज्य जिसके गर्भ में खनिज के भंडार हैं। वादियों में खूबसूरती है। ऊपजाऊ जमीन है। झारखंड जिसके पास दुनिया की सबसे पुरानी धरती है। जब पहली बार धरती बनी थी तो सबसे पहली झारखंड की जमीन बनी थी। यह वैज्ञानिक तौर पर प्रमाणित हो चुका है। यह झारखंड का पश्चिमी सिंहभूम जिला है, जहां लौह अयस्क के भंडार हैं।
झारखंड एक युवा राज्य है। साल 2000 में इसका जन्म हुआ। एक जवान राज्य के पास तेजी से आगे बढ़ने के लिए सब कुछ है। इच्छाशक्ति और संसाधन है। लेकिन, जिस रफ्तार से राज्य को आगे बढ़ना था, उस रफ्तार में कहीं ना कहीं राज्य थोड़ा पीछे चल रहा है। इसके पीछे एक ही वजह दिखाई पड़ती है राजनीतिक अस्थितरता।
झारखंड बनने के बाद से ही राज्य ने राजनीतिक तौर पर काफी उतार चढ़ाव देखे। एक नए जन्मे राज्य की राजनीति में कई तरह के प्रयोग हुए। सरकारें अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाईं। हालांकि, अब राज्य में एक स्थिर सरकार है और विकास रफ्तार पकड़ रहा है।
धरातल पर दिख रहा विकास, लोगों के सपने भी हो रहे पूरे
केंद्र और राज्य सरकार की योजनाएं धरातल पर उतर रही हैं। जमीन पर बदलाव दिख रहा है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के सफल नेतृत्व में झारखंड सपने देख रहा है और उनमें रंग भी भर रहा है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के रूप में एक ऐसा व्यक्ति मिला है, जो एक आंदोलनकारी के पुत्र हैं और ऐसे राजनीतिक परिवार से आते हैं, जिन्होंने झारखंड को सींचा है और यहां की राजनीति को जिया है। यहां की परंपरा, संस्कृति और जनता की नब्ज को पहचानते हैं। जनता की जरूरतों को समझते हैं। उनके हिसाब से योजनाएं बनाते हैं। अलग झारखंड बनने के बाद अब राज्य को सही दिशा मिली और यह सही दिशा में आगे भी बढ़ रहा है।
हेमंत सोरेन के मुख्यमंत्री बनने के बाद राज्य में विकास योजनाएं तेजी से चल रही हैं। किसान, युवा, गरीब महिलाएं समाज के सभी वर्ग के लोगों के लिए योजनाएं चलाई जा रही हैं और योजनाओं का लाभ भी लोगों को मिल रहा है। मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना भी एक ऐसी ही पहल है, जो सरकार के लिए गेमचेंजर साबित हुई है। राज्य की महिलाओं को इसका लाभ मिल रहा है।
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आधारभूत संरचनाओं में सुधार, मूलभूत सुविधाएं भी बेहतर
इसके अलावा राज्य की आधारभूत संरचनाओं के विकास को लेकर भी काफी काम हो रहे हैं। किसानों के लिए कृषि ऋण माफी योजना चलाई जा रह है। नई सिंचाई परियोजनाओं की शुरुआत की जा रही है। कृषि और किसानों के हित में कार्य किए जा रहे हैं। नए सड़कों का निर्माण हो रहा है। राज्य गठन के वक्त यहां कुल सड़क लंबाई महज 5,400 किलोमीटर थी, जो बढ़कर 14,973.63 किलोमीटर से ज्यादा हो चुकी है। बिजली व्यवस्था में सुधार लाया जा रहा है। स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में विकास हो रहा है। जनता तक बुनियादी मूलभूत सुविधाओं का लाभ पहुंचाने के लिए कार्य किया जा रहे हैं।
राज्य गठन के बाद से ही नक्सलवाद एक बड़ी समस्या थी, जिसके कारण निवेशक नहीं आ रहे थे। अब राज्य से नक्सली लगभग समाप्त हो चुके हैं, इसलिए अब बाहरी निवेशक भी राज्य में आ रहे हैं। सड़क और रेलमार्ग का नेटवर्क तैयार होने के बाद निवेश की संभावनाएं बढ़ी हैं और नई कंपनियां राज्य में आ रही हैं। झारखंड बनने के बाद कई नई कंपनियां राज्य में बनीं हैं। इससे राज्य में ही युवाओं के लिए रोजगार के अवसर तैयार हो रहे हैं। तकनीकी शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक के संस्थान खुल रहे हैं। समाज को शिक्षित बनाने के साथ-साथ आगे ले जाने का प्रयास किया जा रहा है। इस तरह से हर एक क्षेत्र में झारखंड अब तरक्की कर रहा है।
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